मगरलोड क्षेत्र के मेघा में ओबीसी वर्ग द्वारा बुद्ध पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। ओबीसी संयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में तथागत भगवान बुद्ध की 2588वीं जयंती के अवसर पर समाज को जागरूक करने और एकजुट करने का संदेश दिया गया।
बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी (नेपाल) में हुआ था। उन्होंने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर सत्य की खोज में कठोर तपस्या की और अंततः बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। यही दिन उनके महापरिनिर्वाण का भी प्रतीक माना जाता है, जिससे यह तिथि और भी पवित्र बन जाती है।
इस अवसर पर ओबीसी संयोजन समिति, ब्लॉक मगरलोड द्वारा “ओबीसी जन जागरण महा अभियान” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी एवं प्रवक्ता समारू सिंहा ने ओबीसी समाज की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग मूल रूप से तर्कशील, आध्यात्मिक और विवेकशील समाज है, लेकिन अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के अभाव में आज यह वर्ग सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर शोषण का सामना कर रहा है।
सिंहा ने यह भी उल्लेख किया कि मगरलोड क्षेत्र में स्थित निरई माता, कुकुर देवी, मधुबन धाम, सहदेव सहदाई और महानदी के तट प्राचीन काल से ही बुद्ध की विरासत को दर्शाते हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को प्रमाणित करते हैं।
उन्होंने कुछ असमानतावादी शक्तियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये तत्व ओबीसी वर्ग के अधिकारों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। मंडल आयोग की सिफारिशों का विरोध और वर्तमान में यूजीसी इक्वलिटी रेगुलेशन के खिलाफ खड़े होना इसी मानसिकता को दर्शाता है। इसके बावजूद ओबीसी समाज निरंतर संघर्ष करते हुए जन-जागरण के माध्यम से अपनी एकता को मजबूत कर रहा है।
कार्यक्रम में चंद्रहास साहू, ऋषि राम, गोविंद राम, रामनारायण, कृष्ण कुमार तोरण निषाद सहित कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन वेद राम साहू (पंच) द्वारा किया गया।

