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*पुलिस अधीक्षक धमतरी के निर्देशन में धमतरी पुलिस का त्वरित एक्शन: गणेश प्रतिमा खरीदने आए युवक से मारपीट कर लूट की वारदात का खुलासा, 02 आरोपी गिरफ्तार*
 नगरी क्षेत्र के तीन सपूतों को राज्य स्तरीय सम्मान - साहित्य और कला के क्षेत्र में बढ़ाया जिले का मान, भारती दलित साहित्य अकादमी का शिक्षक स्वाभिमान दिवस राज्य सम्मान`  *अन्य विकल्प:* 1.  `नगरी का गौरव: बिरझू अग्रवानी उर्फ भगवती लाल सेन को साहित्य रत्न, सांकरा के फलेन्द्र कश्यप और मोदे के विकास शांडिल्य को संस्कृति दूत अवार्ड` 2.  `छत्तीसगढ़ी-हिंदी साहित्य से टेराकोटा मूर्तिकला और लीफ आर्ट तक - नगरी के तीन कलाकारों को मिला राज्य सम्मान, देश भर की पत्रिकाओं में छपती हैं रचनाएं, बस्तर आर्ट से लेकर गणेश-दुर्गा मूर्तियों तक बनाते हैं आकर्षक कलाकृतियां`  *2. अखबार के लिए पूरी खबर (लंबी-चौड़ी)*  *नगरी/धमतरी।* धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण है। क्षेत्र के तीन प्रतिभावान साहित्यकारों और कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट साधना के लिए राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया गया है।  भारती दलित साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित शिक्षक स्वाभिमान दिवस राज्य सम्मान समारोह नत्थूजी जगताप नगर पालिका शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, धमतरी में आयोजित किया गया था। इस समारोह में नगरी क्षेत्र के तीन कलाकारों को सम्मानित किया गया।  *1. बिरझू अग्रवानी (भगवती लाल सेन) - साहित्य रत्न अवार्ड:* नगरी क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार बिरझू अग्रवानी, जिन्हें भगवती लाल सेन के नाम से भी जाना जाता है, को साहित्य रत्न अवार्ड से नवाजा गया। वे पिछले कई वर्षों से साहित्य सेवा में लगे हैं। छत्तीसगढ़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में उनकी रचनाएं विभिन्न मासिक पत्रिकाओं और देश की अलग-अलग प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती हैं। तीज-त्यौहार, सामाजिक सरोकार और छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर उनकी रचनाओं को छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में पढ़ा और सराहा जाता है। साहित्य के क्षेत्र में उन्हें इससे पहले भी कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।  *2. फलेन्द्र कश्यप, ग्राम सांकरा - मूर्तिकला में संस्कृति दूत अवार्ड:* ग्राम सांकरा निवासी युवा मूर्तिकार फलेन्द्र कश्यप को मूर्तिकला के क्षेत्र में संस्कृति दूत अवार्ड से सम्मानित किया गया। फलेन्द्र टेराकोटा सहित अनेक प्रकार की मिट्टी की मूर्तियां बनाते हैं। वे छोटे से लेकर बड़े आकार तक की मूर्तियां बनाने में सिद्धहस्त हैं। बस्तर के आदिवासी कला, वर्तमान में गणेश और दुर्गा की विशाल और मनमोहक मूर्तियों के निर्माण में उनका विशेष योगदान है। उनकी कलाकृतियों को परब (नया रायपुर), जोहार आदिवासी कला मंच और दुर्ग जिले में स्थापित बड़ी-बड़ी मूर्तियों के रूप में देखा जा सकता है। मूर्तिकला के क्षेत्र में उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।  *3. विकास शांडिल्य, ग्राम मोदे - लीफ आर्ट में संस्कृति दूत अवार्ड:* ग्राम मोदे निवासी विकास शांडिल्य, जो लीफ आर्टिस्ट के रूप में प्रसिद्ध हैं, को भी संस्कृति दूत अवार्ड प्रदान किया गया। वे पत्तों पर कला उकेरने की अनूठी कला में माहिर हैं। सामाजिक विषयों, तीज-त्यौहारों, देवी-देवताओं, देश-विदेश के महापुरुषों और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर वे पत्तों पर अद्भुत कलाकृतियां बनाते हैं। उनकी यह कला पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है और क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो रही है।  तीनों कलाकारों को यह सम्मान मिलने पर नगरी क्षेत्र सहित पूरे धमतरी जिले में हर्ष का माहौल है। क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों, कलाकारों और नागरिकों ने तीनों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
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