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25 दिनों में 20 हजार तक की कमाई, ब्रूडिंग उद्यम से आत्मनिर्भर बनी मोहदी की रोहिणी लहरी

 


IFC परियोजना ने बदली जिंदगी, महिला उद्यमिता की बनी मिसाल

:::writing{variant="document" id="58427"} मगरलोड। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना एक प्रभावी पहल साबित हो रही है। इसी परियोजना से जुड़कर मगरलोड विकासखंड के सद्भावना महिला क्लस्टर संगठन, मोहदी की सदस्य रोहिणी लहरी ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

रोहिणी लहरी ने आईएफसी परियोजना के तहत प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर 1500 चूजों की क्षमता वाला ब्रूडिंग केंद्र स्थापित किया। उन्होंने हैचरी से प्राप्त एक दिन के चूजों का 25 दिनों तक वैज्ञानिक पद्धति से पालन-पोषण किया और तैयार चूजों को अपने संकुल की महिला समूह सदस्यों एवं ग्रामीण हितग्राहियों को विक्रय किया।

इस उद्यम से उन्हें मात्र 25 दिनों में 18 हजार से 20 हजार रुपये तक का लाभ प्राप्त हुआ। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उन्हें एक सफल महिला उद्यमी के रूप में नई पहचान भी मिली।

रोहिणी लहरी बताती हैं कि आईएफसी परियोजना से जुड़ने के बाद उन्हें व्यवसाय संचालन, चूजा प्रबंधन, टीकाकरण, पोषण और विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इसी ज्ञान और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने उद्यम को सफलतापूर्वक संचालित किया।

उनकी सफलता का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण चूजों की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी कुक्कुट पालन व्यवसाय से जुड़ रही हैं और अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

रोहिणी लहरी की सफलता के पीछे जिला प्रशासन एवं आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कलेक्टर के मार्गदर्शन, जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व, जिला मिशन प्रबंधक अनुराग मिश्रा, जनपद सीईओ दिव्या ठाकुर, विकासखंड परियोजना प्रबंधक कमल कुजूर तथा आईएफसी एंकर दीपक साहू के सतत सहयोग से यह सफलता संभव हो सकी। इसके अलावा ग्राम मोहदी के सरपंच, सीआरपी दीदी, पीआरपी दीदी तथा मोहदी क्लस्टर की सभी पदाधिकारी महिलाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आज रोहिणी लहरी पूरे मोहदी संकुल ही नहीं बल्कि मगरलोड विकासखंड की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ समाज में एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती हैं।

रोहिणी लहरी का संदेश है, “मेहनत और सही मार्गदर्शन से हर महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। आईएफसी परियोजना ने मुझे रोजगार, सम्मान और नई पहचान प्रदान की है।” :::

बॉक्स न्यूज / सफलता की कहानी

नाम: रोहिणी लहरी

ग्राम: मोहदी, मगरलोड

उद्यम: चूजा ब्रूडिंग केंद्र

क्षमता: 1500 चूजे

अवधि: 25 दिन

लाभ: ₹18,000 से ₹20,000

विशेषता: IFC परियोजना से प्रशिक्षण प्राप्त कर बनी सफल महिला उद्यमी।

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