*धमतरी।* ग्राम भेंडरी में शनिवार, दिनांक 30 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यहां गायग्वाल (कलार) सिन्हा परिवार की वंशावली पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इस पुस्तक के विमोचन के साथ ही परिवार के सैकड़ों वर्षों के गौरवशाली इतिहास, परंपरा और संस्कृति को एक स्थायी दस्तावेज के रूप में संरक्षित कर दिया गया है।
*वर्षों की मेहनत और शोध का परिणाम है यह ग्रंथ*
इस वंशावली पुस्तक के लेखक ग्राम भेंडरी के ही निवासी *श्री किशुन राम सिन्हा* हैं, जबकि इस कार्य में *श्री गुणिक लाल सिन्हा* ने मुख्य सहयोगी के रूप में अहम भूमिका निभाई है। जानकारी के अनुसार लेखक द्वय ने वर्षों तक कड़ी मेहनत, शोध, बुजुर्गों से चर्चा और पुराने दस्तावेजों को खंगालने के बाद अपने परिवार के वंश-वृक्ष को इस पुस्तक के रूप में संजोया है। यह पुस्तक जून 2026 में ही प्रकाशित हो चुकी थी, जिसका आज विधिवत विमोचन समारोह आयोजित किया गया।
पुस्तक में सिन्हा परिवार की उत्पत्ति, उनके पूर्वजों के कार्य, गांव में बसने का इतिहास, परिवार के विभिन्न शाखाओं का विवरण और समाज में उनके योगदान को बड़े ही सुंदर और क्रमबद्ध तरीके से दर्शाया गया है। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि परिवार की पहचान और जड़ों से जुड़े रहने का एक माध्यम है।
*भव्य समारोह में उमड़ा परिवार*
विमोचन समारोह के अवसर पर गायग्वाल (कलार) सिन्हा परिवार के वरिष्ठजन, युवा, महिलाएं और छोटे बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के इस आधुनिक युग में जब लोग अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, ऐसे में यह वंशावली पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगी।
वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को अपने पूर्वजों के त्याग, संघर्ष और संस्कारों से अवगत कराएगी और समाज की परंपरा व संस्कृति को संरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे बच्चों में अपने परिवार और समाज के प्रति गौरव की भावना जागृत होगी।
*लेखक द्वय का किया गया सम्मान*
कार्यक्रम के अंत में समस्त परिवारजनों की ओर से इस महान और सराहनीय कार्य के लिए लेखक श्री किशुन राम सिन्हा और मुख्य सहयोगी श्री गुणिक लाल सिन्हा का शाल, श्रीफल और पुष्पमाला से सम्मान किया गया। सभी ने उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए आभार व्यक्त किया और इस पुस्तक को परिवार की अमूल्य धरोहर बताया।
