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*विश्व आदिवासी दिवस: नगरी कृषि मंडी में बरगद के पत्ते पर उकेरी गई आदिवासी संस्कृति, हजारों की मौजूदगी*




 *"जल-जंगल-जमीन के रक्षक हैं आदिवासी" : धमतरी में विश्व आदिवासी दिवस पर सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन*

 *बरगद के पत्ते पर आदिवासी स्वाभिमान: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. जितेंद्र मीणा बोले- संस्कृति बचाना हमारा कर्तव्य*



*धमतरी संपादक राजू साहू *  विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को जिला मुख्यालय धमतरी के नगरी कृषि मंडी परिसर में सर्व आदिवासी समाज द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाज के महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए।


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बरगद के पत्तों पर बनाई गई आदिवासी समाज की जीवंत आकृतियां रहीं। इन कलाकृतियों के माध्यम से आदिवासी जीवन के सात महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। कलाकारों ने बताया कि जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा का संदेश आदिवासी समाज को प्रकृति का संरक्षक बताता है। वहीं एकता और सामूहिकता को दर्शाती आकृति संगठन और भाईचारे का प्रतीक है। भाले के माध्यम से साहस और वीरता, आत्मरक्षा और संघर्ष को दर्शाया गया।


प्रकृति से जुड़ाव को दिखाने के लिए पूरी कला ही एक पत्ते पर उकेरी गई, जो आदिवासी समाज के प्रकृति प्रेम को दर्शाती है। पारंपरिक वेशभूषा वाली आकृतियां सांस्कृतिक गौरव और आदिवासी पहचान की विरासत को सम्मान देती हैं। सिर ऊंचा करके खड़ी आकृति स्वाभिमान और आत्मसम्मान का संदेश देती है। आयोजकों ने कहा कि यह कला नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और यह बताती है कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखना हमारा कर्तव्य है।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जितेंद्र मीणा शामिल हुए। उनका समाज के पदाधिकारियों द्वारा शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। प्रो. मीणा ने विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि मेला और इस तरह के आयोजन आदिवासी समाज को एक मंच देते हैं जहां वे अपनी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं।


कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जीवराखन लाल मरकाम, हृदय नाग, उमेश देव, हलधर, शदुल, प्रमोद कुंजाम, श्रीधन सोम, नवीन गौर, बुधेश नायक, खेमचंद पुजारी, देवेंद्र कश्यप, गजाधर कश्यप, दीनानाथ जलधर, संतोष नेताम, संत नेताम, निखिल, राकेश, जितेश्वर, निक्की कश्यप, करिश्मा पुजारी, पूजा नेताम, गरिमा ध्रुव, गौरी गौर, ज्योति गौर सहित जिले भर से आए समाज प्रमुख उपस्थित थे।


समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा संरक्षक है और हमें अपनी भाषा, वेशभूषा और परंपराओं को जीवित रखना होगा। कार्यक्रम के अंत में पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुति दी गई।



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