सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र, उदयपुर, राजस्थान में *‘हमारी सांस्कृतिक विविधता’* विषय पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन *12 अगस्त 2026 से 21 अगस्त 2026* तक किया गया। कार्यशाला में देश के 16 राज्यों से 115 शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं, कला, हस्तशिल्प, लोकगीत, लोकनृत्य, खान-पान, वेशभूषा, स्थापत्य एवं विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा इन विषयों को विद्यालयीन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया से जोड़ने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन किया तथा *सांस्कृतिक विविधता में एकता, लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन और भावी पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत को पहुँचाने* के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला में व्याख्यान, समूह चर्चा, व्यावहारिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को विषय की व्यवहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को राजस्थान की समृद्ध कला एवं संस्कृति से रूबरू कराने के उद्देश्य से विभिन्न *सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों* भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण, लोक कला मंडल, और शिल्पग्राम का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इससे शिक्षकों को स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं एवं विरासत को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों की सहभागिता ने ‘विविधता में एकता’ की भारतीय अवधारणा को साकार रूप प्रदान किया। विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, परंपराओं और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रतिभागियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय एवं पारस्परिक समझ की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई।
*छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति की प्रस्तुति*
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, लोक कला, लोक परंपराओं, लोकगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत से शिक्षकों को परिचित कराना तथा इन विविध सांस्कृतिक स्वरूपों को विद्यालयीन शिक्षण से जोड़ना रहा।
इस अवसर पर **छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति की विशेष प्रस्तुति** दी गई। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। छत्तीसगढ़ की सहज, जीवंत एवं लोकजीवन से जुड़ी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने कार्यशाला में विशेष आकर्षण उत्पन्न किया।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रस्तुति में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने सहभागिता की। इनमें **नोमेश साहू (धमतरी),टोमन लाल मालेकर (बालोद), रोमन लाल साहू (बेमेतरा), महेन्द्र कुमार पंत (गरियाबंद), खुशबु जैन (कांकेर), मंजू वर्मा (महासमुंद), प्रेमलता सिंह (दुर्ग), संध्या श्रीवास्तव (कोंडागांव),एवं डालिम सिदार (रायगढ़)** शामिल रहे।
प्रतिभागी शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की विविध विधाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए प्रदेश की **लोक परंपरा, कला, संगीत, नृत्य एवं सांस्कृतिक जीवन** की विशेषताओं से अन्य राज्यों के शिक्षकों को परिचित कराया। इस प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय संस्कृति एवं लोक परंपराओं का आदान-प्रदान किया। इससे ‘विविधता में एकता’ की भारतीय भावना को मजबूती मिली और प्रतिभागियों को देश की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला।
CCRT उदयपुर में आयोजित इस कार्यशाला ने शिक्षकों को यह समझने का अवसर प्रदान किया कि **लोक कला एवं संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक स्मृति, परंपरा, पहचान और मूल्यबोध की महत्वपूर्ण धरोहर है।** विद्यालयों के माध्यम से इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम को प्रतिभागियों ने सराहा और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की समृद्धि एवं विविधता की प्रशंसा की। इस प्रकार यह आयोजन **छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल** सिद्ध हुआ।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और गौरव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
