रायपुर। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण युवाओं में फैटी लिवर और लिवर कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो बीमारियां पहले उम्रदराज़ लोगों या शराब सेवन करने वालों तक सीमित मानी जाती थीं, अब 20 से 30 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
MMI नारायणा हॉस्पिटल रायपुर के कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ (NAFLD) भारत में सबसे आम लिवर समस्याओं में से एक बन चुकी है। इसका मुख्य कारण लंबे समय तक बैठकर काम करना, जंक फूड का अधिक सेवन, मोटापा, डायबिटीज़, तनाव और अनियमित दिनचर्या है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में फैटी लिवर सामान्य लग सकता है, लेकिन समय के साथ यह सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और आगे चलकर लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों से बीमारी की समय पर पहचान की जा सकती है। थकान, वजन बढ़ना या पाचन संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. जैन ने कहा कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, शुगर और प्रोसेस्ड फूड कम करना तथा डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना फैटी लिवर से बचाव के प्रभावी उपाय हैं।
19 अप्रैल को मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के अवसर पर उन्होंने युवाओं से अपने लिवर की जांच और देखभाल को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ लिवर ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
