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सुशासन तिहार में जिला पंचायत CEO के सामने गिड़गिड़ाए ग्रामीण, VIDEO ने खोली योजनाओं की जमीनी हकीकत


पक्के घर की आस में अधिकारियों के सामने दंडवत हुए ग्रामीण


 सुशासन तिहार में भावुक दृश्य, आवास के लिए जमीन पर लेटे ग्रामीण


 PM आवास नहीं मिला तो CEO के सामने गिड़गिड़ाए आदिवासी परिवार


सरकारी दावों पर सवाल: घर के लिए दंडवत हुए कमार समाज के लोग

 आवास योजना से वंचित ग्रामीणों की गुहार, VIDEO हुआ वायरल

जर्जर मकानों से परेशान ग्रामीणों का फूटा दर्द

सुशासन के मंच पर छलका आदिवासियों का दर्द

 घर की मांग को लेकर अधिकारियों के पैरों में गिरे ग्रामीण

आवास योजना की आस में दंडवत हुए गरीब परिवार

 गरियाबंद में भावुक तस्वीर: पक्के घर के लिए जमीन पर लेटे ग्रामीण


गरियाबंद के सुशासन तिहार कार्यक्रम में PM आवास योजना की मांग को लेकर कमार जनजाति के ग्रामीण जिला पंचायत CEO के सामने दंडवत हो गए। भावुक VIDEO ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने से नाराज और परेशान कमार जनजाति के ग्रामीण जिला पंचायत CEO के सामने दंडवत हो गए। किसी ने अधिकारियों के पैर पकड़कर घर दिलाने की गुहार लगाई, तो कोई जमीन पर लेटकर अपनी पीड़ा सुनाता नजर आया। इस घटना ने सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


कमजोर वर्ग के लिए आवास योजना का लाभ


मिली जानकारी के अनुसार, देवभोग विकासखंड के बरही गांव में रहने वाले कमार जनजाति के कई परिवार लंबे समय से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से जर्जर और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में उनके घरों की छतें टपकती हैं और परिवार असुरक्षित हालात में जीवन बिताने को विवश हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें पक्के मकान की सुविधा नहीं मिल सकी है।

गरियाबंद जिले के सुशासन तिहार कार्यक्रम में कमार जनजाति के ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना की मांग को लेकर जिला पंचायत सीईओ के सामने दंडवत हो गए।


ग्रामीणों ने सीईओ के सामने बयां की अपनी व्यथा

सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान जब जिला पंचायत सीईओ ग्रामीणों की समस्याएं सुन रहे थे, तभी कमार समाज के लोग अपनी फरियाद लेकर उनके सामने पहुंच गए। महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों ने दंडवत होकर अपनी पीड़ा बयां की और कहा कि उन्होंने कई बार पंचायत और जनपद स्तर पर आवेदन दिए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया।


कमजोर वर्ग की आवाज दबाने की कोशिश

इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज को संरक्षण और विकास के लिए विशेष योजनाओं का लाभ देने की बात सरकार लगातार करती रही है।


ऐसे में यदि इसी समुदाय के लोगों को बुनियादी आवास जैसी मूलभूत सुविधा के लिए अधिकारियों के सामने इस तरह गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।


व्यवस्था पर उठे सवाल

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य पर चिंता जताई। उनका कहना था कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में जरूरतमंद अब भी भटक रहे हैं। यदि सुशासन तिहार जैसे मंच पर भी गरीबों को अपनी बात सुनाने के लिए इस तरह दंडवत होना पड़े, तो यह व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है।


जल्द मिलेगा योजना का लाभ

हालांकि, प्रशासन की ओर से मामले की जांच कर पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों के दस्तावेजों और पात्रता की समीक्षा की जाएगी और पात्र पाए जाने पर उन्हें जल्द योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

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