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कुंडेल में बेखौफ अवैध रेत कारोबार: बिना नंबर प्लेट दौड़ रहे ट्रैक्टर, खनिज विभाग और प्रशासन पर उठे सवाल


मगरलोड। विकासखंड मगरलोड अंतर्गत ग्राम कुंडेल और करेली बड़ी क्षेत्र में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और डंपिंग का खेल खुलेआम जारी है। क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया प्रशासनिक नियमों और खनिज विभाग के निर्देशों को धता बताते हुए रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता और मौन भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों एवं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार करेली बड़ी स्थित रेत घाट में प्रतिदिन तड़के लगभग 3 बजे से ट्रैक्टरों की लंबी कतार लगनी शुरू हो जाती है। सुबह 10 से 11 बजे तक लगातार रेत का उत्खनन और परिवहन जारी रहता है। बड़ी संख्या में ट्रैक्टर रेत भरकर विभिन्न स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि कई ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिना नंबर प्लेट के चल रहे वाहनों के कारण किसी भी दुर्घटना की स्थिति में वाहन मालिकों और चालकों की पहचान करना बेहद कठिन हो जाएगा। यदि भविष्य में कोई बड़ी सड़क दुर्घटना होती है तो पीड़ितों को न्याय मिलने में भी परेशानी आ सकती है। ऐसे में परिवहन नियमों की खुलेआम अनदेखी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

सूत्रों के मुताबिक रेत माफिया केवल अवैध उत्खनन और परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जेसीबी मशीनों के माध्यम से हाईवे किनारे बड़े पैमाने पर रेत का अवैध डंप भी कर रहे हैं। इसके बाद ऊंचे दामों में रेत बेचकर लाखों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है। बताया जाता है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर अवैध रेत के बड़े-बड़े भंडारण स्थल बनाए गए हैं, जहां से मांग के अनुसार रेत की सप्लाई की जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टरों का आवागमन हो रहा है, जेसीबी मशीनें खुलेआम संचालित हो रही हैं और हाईवे किनारे अवैध डंपिंग की जा रही है, तब खनिज विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? यह प्रश्न आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अवैध रेत कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन खनिज विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो शासन को राजस्व का भारी नुकसान होता रहेगा और पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचेगी।

अवैध उत्खनन के कारण नदी तटों का स्वरूप बिगड़ रहा है। जलस्तर प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को भी भारी वाहनों के लगातार आवागमन से नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता लोगों के बीच नाराजगी का कारण बन रही है।

अब देखना यह होगा कि लगातार सामने आ रही शिकायतों और आरोपों के बाद जिला कलेक्टर एवं खनिज विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या अवैध रेत कारोबार पर लगाम लगाने के लिए कोई बड़ी कार्रवाई होगी या फिर रेत माफियाओं का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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