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हाईकोर्ट और DGP की चौखट पर पीड़ित परिवार - मगरलोड पुलिस पर 40 लाख की भू-माफिया सिंडिकेट को बचाने का आरोप


 

सबूत दबाने के खेल पर भड़के पीड़ित सचिन बगानी, बोले - 110 दिन तक आरोपियों को खुला संरक्षण क्यों?

मगरलोड में FIR 77/2026: दो मोहरों को जेल भेजकर मामले को रफा-दफा करने का आरोप, अब CBI जांच की मांग

मगरलोड पुलिस द्वारा सिर्फ दो मोहरों को जेल भेजकर 40 लाख की धोखाधड़ी के मामले को रफा-दफा करने की कोशिश के खिलाफ पीड़ित परिवार ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

पीड़ित प्रार्थी सचिन बंगानी नया पारा राजिम ने बताया कि वे अब इन सभी सरकारी दस्तावेजों, पांच पत्रों की FIR, आमानाका थाने के पुराने रिकॉर्ड और मगरलोड पुलिस के RTI के इंकार पत्र को लेकर सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) छत्तीसगढ़ और गृहमंत्री से मुलाकात करेंगे।

पीड़ित पक्ष का साफ कहना है कि साक्ष्य छुपाने और 110 दिनों तक आरोपियों को खुला संरक्षण देने वाले जांच अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।




*फर्जी दस्तावेज कहां से बने? बड़ा सवाल*

पीड़ित सचिन बगानी ने मगरलोड थाना के FIR 77/2026 में युगल किशोर देवांगन, भुनेश्वर देवांगन बेलटुकरी, अमित शर्मा पिता विनोद शर्मा सोनकर पारा गोबरा नयापारा राजिम, अभिषेक शर्मा उर्फ राहुल के साथ अन्य संलिप्त लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़ित का आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी ऋण पुस्तिका, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, सील और अन्य दस्तावेज कहां से बनवाए? किस कंप्यूटर दुकान या किस विभागीय अधिकारी की सांठगांठ से ये हुआ? इस सांठगांठ करने वाले रसूखदार लोगों को आखिर पुलिस क्यों नहीं पकड़ रही है? क्या आरोपी किसी बड़े नेता के करीबी हैं या कोई बड़ी सांठगांठ की गई है।

*हाईकोर्ट में रिट याचिका की तैयारी*

इसके साथ ही थानों की सीसीटीवी फुटेज को कोर्ट की निगरानी में सुरक्षित कराने और इस बहु-करोड़ी भू-माफिया सिंडिकेट की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी जैसे CID या CBI से कराने के लिए बिलासपुर उच्च न्यायालय में बहुत जल्द एक आपराधिक रिट याचिका दायर करने की तैयारी की जाएगी।

पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया है कि आम जनता जानना चाहती है कि इस 40 लाख की धोखाधड़ी करने वाले संलिप्त बड़े मछलियों, सिंडिकेट गिरोह को मगरलोड पुलिस पकड़ने से क्यों कतरा रही है और कब तक पुलिस कानून के इस लंबे हाथ को समेट कर रखे रहेगी।


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