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धमतरी जिला हाल है बेहाल: श्रम कार्यालय में बिना 1500-2000 के नहीं बन रहा श्रम कार्ड, एक सप्ताह में चाहिए कार्ड तो देना होगा कमीशन



बिना रिश्वत नहीं होता काम: 3 माह से अटका था आवेदन, 1500 देते ही 1 सप्ताह में बन गया श्रम कार्ड


धमतरी में श्रम विभाग में भ्रष्टाचार उजागर, मृत्यु योजना और नोनी जतन योजना में भी बिना पैसे के नहीं होता काम



 श्रम कार्ड के नाम पर वसूली: नरेगा कार्य दिवस के नाम पर पहले निरस्त, पैसे देते ही स्वीकृत

 श्रम विभाग में खुलेआम वसूली, श्रमिकों से 1500 से 2000 रुपये की मांग



*धमतरी।* जिले में शासकीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार किस कदर हावी है, इसका ताजा उदाहरण श्रम विभाग से सामने आया है। यहां श्रमिकों का श्रम कार्ड बनवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। बिना कमीशन और रिश्वत के कार्यालय में कोई काम नहीं हो रहा है।

एक प्रार्थी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उसने 3 माह पहले श्रम कार्ड के लिए आवेदन किया था। कार्यालय के कर्मचारियों ने नरेगा में कार्य दिवस पूर्ण नहीं होने का हवाला देकर उसके आवेदन को निरस्त कर दिया। प्रार्थी लगातार कार्यालय के चक्कर लगाता रहा लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता था।

जब प्रार्थी ने दलाल को 1500 रुपये देकर दोबारा आवेदन किया तो मात्र एक सप्ताह के भीतर ही उसका श्रम कार्ड बनकर तैयार हो गया। इससे यह सिद्ध होता है कि श्रम कार्यालय में बिना लेन-देन के कोई भी कार्य नहीं किया जाता है।

श्रमिकों का आरोप है कि सिर्फ श्रम कार्ड ही नहीं, बिना दलाल  शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे मृत्यु सहायता योजना और मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना (नोनी जतन योजना) के तहत भी बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने के लिए भी कार्यालय में रिश्वत देनी पड़ती है।

श्रमिकों का कहना है कि शासन द्वारा श्रमिकों के हित के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कार्यालय में बैठे भ्रष्ट कर्मचारी इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी गरीब श्रमिकों से वसूली कर रहे हैं। 1500 से 2000 रुपये देने पर ही एक सप्ताह में श्रम कार्ड बनाकर दिया जा रहा है, जबकि पैसे न देने पर महीनों तक आवेदन को लटकाया जाता है और फिर निरस्त कर दिया जाता है।

इस पूरे मामले ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरतमंद श्रमिकों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि श्रम कार्यालय में हो रही इस खुलेआम भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।




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