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मगरलोड में पीएमएफएमई कार्यशाला आयोजित, 14 हितग्राहियों के आवेदन स्वीकृत

 


35 प्रतिशत अनुदान योजना से ग्रामीण युवाओं और किसानों को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर


मगरलोड जनपद पंचायत परिसर में आज प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण हितग्राही और युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान योजना से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां विस्तारपूर्वक दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि पीएमएफएमई योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के इच्छुक लोगों को 35 प्रतिशत तक अनुदान की सुविधा प्रदान की जाती है, जिससे वे कम लागत में अपना व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्योग स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, बैंक ऋण, प्रशिक्षण सुविधाएं तथा खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े विभिन्न व्यवसायों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को मसाला निर्माण, अचार-पापड़ उद्योग, फल-सब्जी प्रसंस्करण, डेयरी उत्पाद, अनाज आधारित उत्पाद तथा अन्य सूक्ष्म उद्योगों की संभावनाओं से अवगत कराया गया।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की यह योजना ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।

इस अवसर पर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री दिव्या ठाकुर, उद्योग विभाग की प्रबंधक  प्रचेता किरण, डीआरपी डॉ. संदीप मेश्राम सहित कृषि, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने प्रतिभागियों को योजना का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।

कार्यशाला के दौरान कुल 14 हितग्राहियों के आवेदन स्वीकृत किए गए, जिससे उन्हें शीघ्र ही योजना का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। आवेदन स्वीकृत होने से हितग्राहियों में उत्साह का माहौल देखा गया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार अपनाने तथा सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने का संदेश दिया गया। यह कार्यशाला स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल साबित हुई।

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