रायपुर। हर वर्ष 11 अप्रैल को देशभर में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षित गर्भावस्था और जागरूकता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाता है।
MMI नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, लालपुर, रायपुर की सीनियर कंसल्टेंट एवं गायनेकोलॉजिकल लैप्रोस्कोपिक व रोबोटिक सर्जन डॉ. वेरोनिका आइरीन युएल ने बताया कि मातृत्व एक अनमोल अनुभव है, लेकिन यह उतना ही संवेदनशील और जिम्मेदारी भरा भी होता है।
उन्होंने कहा कि आज भी कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण और समय पर चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पातीं, जिससे जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है और इसके लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
डॉ. युएल के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान अपनाई गई जीवनशैली का सीधा असर मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। संतुलित आहार, नियमित जांच और मानसिक संतुलन बनाए रखने से गर्भावस्था को सुरक्षित और सहज बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, फल, दालें तथा आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड युक्त आहार लेना चाहिए, जिससे एनीमिया से बचाव और शिशु के विकास में मदद मिलती है।
इसके साथ ही समय-समय पर एंटेनाटल चेक-अप, पर्याप्त नींद, हल्का व्यायाम और योग भी जरूरी है। मानसिक तनाव से दूर रहना और परिवार का सहयोग गर्भावस्था को सुखद बनाता है।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि तंबाकू, शराब और नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि ये मां और शिशु दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। स्वच्छता, टीकाकरण और प्रसव की पूर्व तैयारी भी सुरक्षित मातृत्व के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
डॉ. युएल ने कहा कि सरकार और विभिन्न संस्थाएं महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन परिवार और समाज की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
अंत में उन्होंने संदेश दिया कि एक स्वस्थ मां ही एक स्वस्थ समाज की नींव रखती है। सही जानकारी और देखभाल के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है।
👉 “स्वस्थ मां – स्वस्थ शिशु – स्वस्थ राष्ट्र”
