कम वेतन बचाने के चक्कर में निजी स्कूलों में गैरप्रशिक्षित शिक्षक
फीस मोटी, शिक्षक कच्चे! मगरलोड के निजी स्कूलों की खुली पोल
शिक्षा के मंदिर में नियमों की अनदेखी, बिना प्रशिक्षण के पढ़ा रहे युवक-युवतियां
RTE नियमों की उड़ रही धज्जियां, शिक्षा विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
मगरलोड ब्लॉक के कई निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम और शिक्षा विभाग के नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी स्कूल प्रबंधन प्रशिक्षित शिक्षकों की जगह 12वीं पास और सामान्य ग्रेजुएट युवक-युवतियों को कम वेतन में नियुक्त कर स्कूलों का संचालन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कई निजी स्कूलों में ऐसे शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं जिनके पास न तो B.Ed और न ही D.El.Ed जैसी अनिवार्य प्रशिक्षण योग्यता है। शिक्षा के क्षेत्र में अनुभवहीन युवकों और युवतियों को शिक्षक बनाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी स्कूल मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने से बचते हैं। कम खर्च में स्कूल संचालन के लिए अप्रशिक्षित लोगों को नौकरी देकर शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है, इसके बावजूद कई स्कूलों में अब तक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि विभाग द्वारा निजी स्कूलों से शिक्षकों की योग्यता संबंधी जानकारी लेने या नियमित जांच करने की पहल नहीं दिखाई दे रही है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई करता है या फिर बच्चों का भविष्य यूं ही गैरप्रशिक्षित शिक्षकों के भरोसे चलता रहेगा।
