धमतरी। हटकेशर वार्ड स्थित नागमंदिर प्रांगण में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान शिव की महिमा का रसपान करते हुए धर्म एवं भक्ति के संदेशों को आत्मसात किया। पूरे दिन कथा स्थल "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोषों से गुंजायमान रहा।
कथा के दौरान व्यासपीठ से कथावाचक ने सीता चरित्र, मां पार्वती के जन्म तथा शिव-पार्वती विवाह के दिव्य प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक वर्णन किया। कथावाचक ने बताया कि माता पार्वती का जन्म केवल एक धार्मिक घटना नहीं था, बल्कि यह संसार के कल्याण और भगवान शिव से उनके दिव्य मिलन की पवित्र भूमिका थी। जैसे ही कथा में माता पार्वती के जन्म का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती के जयकारे लगाए। पूरा कथा पंडाल भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर हो गया।
कथा में माता सीता के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए बताया गया कि वे त्याग, समर्पण, धैर्य और मर्यादा की प्रतिमूर्ति थीं। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। कथावाचक ने कहा कि माता सीता का चरित्र मानव जीवन के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक है, जो कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
इसके पश्चात शिव-पार्वती विवाह का भव्य एवं मनोहारी प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। विवाह प्रसंग का वर्णन इतना जीवंत और भावपूर्ण था कि श्रद्धालु स्वयं को उस दिव्य बारात का सहभागी महसूस करने लगे। कथा स्थल पर उपस्थित भक्तगण भक्ति संगीत और जयघोषों के साथ भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते रहे।
शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भगवान शिव एवं माता पार्वती के जयकारे लगाए। कई भक्त भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे, वहीं महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों ने भक्ति गीतों पर तालियां बजाकर अपनी आस्था व्यक्त की। कथा पंडाल में उपस्थित हर व्यक्ति शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि श्री शिव महापुराण कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है। कथा के माध्यम से लोगों को संस्कार, सदाचार एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जा रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर रहे हैं।
कथा के चौथे दिवस ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव एवं माता पार्वती से सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। नागमंदिर प्रांगण में प्रवाहित हो रही शिवमय भक्ति की धारा ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया। श्रद्धालु आगामी दिवस की कथा को लेकर भी उत्साहित नजर आए।
