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सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय, ग्रामीणों ने उठाए सवाल


मगरलोड विकासखंड के ग्राम परसट्ठी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम उस समय चर्चा का विषय बन गया जब क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में नजर नहीं आए। शासन की महत्वाकांक्षी पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर आम नागरिकों को योजनाओं की जानकारी दी गई तथा उनकी समस्याओं और मांगों को सुना गया।


कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न विभागों ने अपनी-अपनी योजनाओं का प्रदर्शन किया तथा ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई। लेकिन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पूरे आयोजन में चर्चा का विषय बनी रही।


ग्रामीणों का कहना है कि सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। ऐसे आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की कड़ी होते हैं। बावजूद इसके कार्यक्रम में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में निराशा और नाराजगी देखने को मिली।


जानकारी के अनुसार भेण्डरी, चन्द्रसूर, नवागांव (बु.), बुड़ेनी, चंदना, परसट्ठी, परेवाडीह, मोहरेंगा, धौराभांठा तथा कुण्डेल सहित आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में पहुंचे थे। लोगों ने उम्मीद जताई थी कि जनप्रतिनिधियों के समक्ष वे अपनी समस्याएं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे रख सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।


ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता के बीच पहुंचकर विकास और जनसेवा के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब जनता से सीधे संवाद का अवसर आता है तो कई बार जनप्रतिनिधि कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखते हैं। इससे लोगों में यह संदेश जाता है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।


हालांकि कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने लोगों की समस्याएं सुनीं और उन्हें निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बावजूद पूरे आयोजन के दौरान जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा और सवालों का केंद्र बनी रही। ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद मजबूत हो सके तथा क्षेत्र के विकास संबंधी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।

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