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विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस: आधुनिक न्यूरोसर्जरी से बढ़ी मरीजों की उम्मीदें


 

रायपुर। हर वर्ष 8 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ब्रेन और स्पाइन ट्यूमर के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा समय पर जांच और उपचार के महत्व को समझाना है। इस अवसर पर वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. घनश्याम ससापर्धी ने कहा कि आधुनिक न्यूरोसर्जरी ने चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए ब्रेन ट्यूमर के उपचार को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है।

एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी (पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़) से प्रशिक्षित तथा पिछले 11 वर्षों में 1000 से अधिक जटिल मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर ऑपरेशन कर चुके डॉ. ससापर्धी ने बताया कि आज न्यूरोसर्जरी का उद्देश्य केवल ट्यूमर निकालना नहीं, बल्कि मरीज की जीवन गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों की मदद से मरीजों की बोलने, चलने-फिरने, सोचने और याद रखने की क्षमता को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में डीटीआई (डिफ्यूजन टेन्सर इमेजिंग) एमआरआई, इंट्रा-ऑपरेटिव न्यूरोमॉनिटरिंग (आईओएनएम), सीयूएसए (कैविट्रॉन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिरेटर), हाई-प्रिसीजन माइक्रोस्कोप तथा हाई-स्पीड ड्रिल्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बन गई है। साथ ही "कीहोल सर्जरी" जैसी विधियों से मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र रिकवरी का लाभ मिल रहा है।

डॉ. ससापर्धी ने कहा कि ब्रेन या स्पाइन ट्यूमर को मृत्यु का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए। समय पर जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख और आधुनिक उपचार पद्धतियों के कारण अधिकांश मरीज सामान्य जीवन में तेजी से वापसी कर रहे हैं।

ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार यदि लगातार सुबह सिरदर्द होना, बिना कारण मतली या उल्टी आना, धुंधला दिखाई देना, पहली बार दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना, संतुलन बिगड़ना अथवा व्यवहार और स्मरण शक्ति में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय पर एमआरआई जांच और विशेषज्ञ से परामर्श उपचार की सफलता की संभावना को काफी बढ़ा देता है। विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर लोगों से अपील की गई है कि वे इन लक्षणों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध संकेत पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

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