धमतरी जिला इन दिनों गंभीर जल संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। जिले में लगातार हो रहे अवैध रेत उत्खनन और बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई ने पर्यावरण संतुलन को प्रभावित कर दिया है। इसका सीधा असर नदियों, तालाबों और भूजल स्तर पर दिखाई देने लगा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं, जिससे लोगों को गर्मी के मौसम में पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों से लगातार अवैध तरीके से रेत निकाले जाने के कारण जल संरक्षण की प्राकृतिक क्षमता कमजोर हो रही है। वहीं दूसरी ओर, हरियाली कम होने से तापमान में वृद्धि और बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध उत्खनन और वृक्षों की कटाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में जिले को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण योजनाओं पर टिकी हुई हैं।
