राजपुर। राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 29 मई शुक्रवार को राजपुर में सुशासन समाधान शिविर आयोजित होगा, जिसमें क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल होकर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखेंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे और लोगों की शिकायतों का निराकरण तत्परता से किया जाए। सुशासन तिहार के प्रथम चरण में 1 मई से 10 जून तक आम जनता से आवेदन लिए जा रहे हैं तथा विभिन्न स्थानों पर समाधान शिविर आयोजित कर समस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया जारी है।
राजपुर में आयोजित होने वाले शिविर में ग्राम पहदा, झाझरकेरा, बोरसी, लड़ेर, भोथा, सोनेवारा, सरगी, मोहंदी, राजपुर, बेलोरा, सोनपैरी, डाभा, करेली छोटी और छिपली पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में भाग लेंगे। शिविर की तैयारियों को लेकर जनपद पंचायत के अधिकारी, कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधि लगातार जुटे हुए हैं। प्रशासन द्वारा शिविर स्थल पर पेयजल, बैठक व्यवस्था, शिकायत पंजीयन और विभागीय स्टॉल की तैयारी की जा रही है ताकि ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी और समाधान मिल सके।
इधर क्षेत्र में लंबे समय से संचालित अवैध रेत डम्पिंग का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पहदा, राजपुर और करेली छोटी सहित कई गांवों में वर्षों से अवैध रेत डेम्पो संचालित हो रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें खराब हो रही हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है तथा शासन को राजस्व की भी हानि हो रही है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही है कि खनिज विभाग सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई करने से बच रहा है। गांवों में चर्चा है कि सुशासन समाधान शिविर के दौरान ग्रामीण सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार से अवैध रेत कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करना चाहती है तो अवैध खनन और रेत डम्पिंग जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि समाधान शिविर केवल औपचारिकता न बनकर उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान का माध्यम बनेगा।
