बिहान योजना के तहत मोहंदी और सिंगपुर में स्थापित केंद्र, उन्नत नस्ल की बकरियों से बढ़ेगी ग्रामीणों की आमदनी और स्वरोजगार
मगरलोड। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जनपद पंचायत मगरलोड के अंतर्गत सद्भावना महिला क्लस्टर संगठन मोहंदी एवं जय मां बंजारी महिला क्लस्टर संगठन सिंगपुर में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) योजना के तहत गोट ब्रीडिंग सेंटर की शुरुआत की गई है। इससे क्षेत्र के किसानों, पशुपालकों एवं महिला समूहों को आजीविका का नया साधन उपलब्ध होगा।
गौरतलब है कि इन क्षेत्रों में पहले चिक्स ब्रूडिंग सेंटर संचालित किए जा रहे थे। अब बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गोट ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल की गुणवत्तापूर्ण बकरियां उपलब्ध कराना तथा बकरी पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों की आय में वृद्धि होगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और सहयोग से संचालित इस परियोजना को कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, जिला मिशन प्रबंधक, जनपद पंचायत सीईओ तथा प्रदान संस्था का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।
परियोजना के सफल संचालन में पशुपालन विभाग मगरलोड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन, पशु स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, प्रजनन प्रबंधन और रोग नियंत्रण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे योजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो रही है।
गोट ब्रीडिंग यूनिट में उन्नत एवं देशी नस्ल की बकरियों का लगभग छह माह तक वैज्ञानिक तरीके से पालन-पोषण किया जाएगा। इसके बाद उनसे प्राप्त स्वस्थ संतानों को तीन माह की आयु पूर्ण होने पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को पांच मादा बकरी एवं एक उन्नत नस्ल के बकरे का पैकेज प्रदान किया जाएगा, जिससे वे बकरी पालन के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना के तहत संचालित इस पहल से आने वाले समय में क्षेत्र में उच्च नस्लीय बकरियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही आजीविका सेवा केंद्रों के माध्यम से पशुपालकों को तकनीकी सलाह, टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
वर्तमान समय में बकरी के मांस एवं दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी। उन्नत नस्ल की बकरियों की उपलब्धता से पशुपालक बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे और आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन पाएंगे।
यह पहल न केवल ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार संवर्धन और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



