Ad Code

Responsive Advertisement

कुदरी पंचायत में सामाजिक न्याय की मांग तेज, SC वर्ग को सरपंच पद आरक्षित करने उठी आवाज


शहडोल। जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरी में आगामी पंचायत चुनाव और परिसीमन को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पंचायत में सामाजिक न्याय और आरक्षण के चक्रानुक्रम नियम को लागू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।

क्षेत्र के युवा समाजसेवी कैलाश कुमार अहिरवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शहडोल कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए मांग की है कि आगामी पंचायत चुनाव में ग्राम पंचायत कुदरी के सरपंच पद को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में लगभग 50 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति वर्ग की है, इसके बावजूद पिछले 25 वर्षों से इस वर्ग को नेतृत्व का अवसर नहीं मिला है।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2000 से अब तक सरपंच पद लगातार अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित रहा है। इस दौरान दलेल सिंह, मोतीलाल सिंह, बिट्टी बाई, पुनः दलेल सिंह तथा वर्तमान में चंद्रवती सिंह सरपंच पद का दायित्व संभाल चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आरक्षण के चक्रानुक्रम नियम का पालन नहीं होने के कारण अनुसूचित जाति वर्ग लोकतांत्रिक भागीदारी से वंचित रहा है।


युवा समाजसेवी कैलाश कुमार अहिरवार ने कहा कि पंचायत में विकास कार्यों की स्थिति चिंताजनक है। पंचायत के पास आज तक कोई सार्वजनिक सामुदायिक भवन नहीं है, जिससे सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में ग्रामीणों को परेशानी होती है। कई मोहल्लों में पक्की सड़कें नहीं हैं और बरसात के दिनों में लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही ग्राम सभाओं के नियमित आयोजन और प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी के कारण आम जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।

कैलाश अहिरवार ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रत्येक वर्ग को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाना है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए वे लगातार संघर्ष करते रहेंगे तथा पंचायत में पारदर्शी और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए यह मुहिम जारी रहेगी।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आगामी परिसीमन में ग्राम पंचायत कुदरी की सामाजिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरपंच पद को अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए। साथ ही पंचायत में पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों और खर्चों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

कैलाश कुमार अहिरवार के नेतृत्व में चल रही इस सामाजिक न्याय की मुहिम को क्षेत्र के युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित निर्णय लेगा।

Ad Code

Responsive Advertisement