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6 गांवों की महिला समूहों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण, स्वरोजगार की दिशा में बढ़ाया कदम


मगरलोड। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम भेंड़री में छह गांवों की महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों के लिए मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में हरदी, बेलौदी, कुण्डेल, मोतिमपुर, धौराभाठा एवं भोथा ग्राम की महिला समूहों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को मशरूम उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कम लागत में मशरूम उत्पादन शुरू कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान बीज चयन, कम्पोस्ट तैयार करने की विधि, उत्पादन प्रक्रिया, तापमान एवं नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल, रोग नियंत्रण, कटाई, पैकेजिंग तथा बाजार में बिक्री के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।


कार्यक्रम में विकासखंड परियोजना प्रबंधक कमल कुजूर ने कहा कि आज के समय में मशरूम उत्पादन ग्रामीण महिलाओं के लिए आय बढ़ाने का एक बेहतर माध्यम बन चुका है। यदि महिलाएं प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का सही ढंग से उपयोग करें तो वे स्वयं का रोजगार स्थापित कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकती हैं। उन्होंने महिला समूहों को शासन की विभिन्न स्वरोजगार एवं आजीविका योजनाओं की जानकारी भी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।


इस अवसर पर लेखापाल सह डाटा एंट्री ऑपरेटर ताम्रध्वज साहू ने महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय प्रबंधन, समूह संचालन तथा स्वरोजगार गतिविधियों के सफल संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समूह आधारित उद्यम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।


मास्टर ट्रेनर चोवा राम साहू ने प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया। उन्होंने महिलाओं को उत्पादन से लेकर विपणन तक की बारीकियों से अवगत कराया तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया और भविष्य में मशरूम उत्पादन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी महिलाओं से अपील की गई कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर स्वरोजगार अपनाएं, अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करें तथा समूह के माध्यम से मशरूम उत्पादन को एक सफल व्यवसाय के रूप में विकसित करें। महिलाओं ने इस प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।

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