महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कार्रवाई के तहत धमतरी पुलिस को एक बड़ी न्यायिक सफलता मिली है। चौकी बिरेझर, थाना कुरूद में दर्ज नाबालिग के अपहरण एवं लैंगिक अपराध के मामले में माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.एस.सी.) धमतरी ने आरोपी कोमल लहरे (21 वर्ष), निवासी मोहदा, थाना अमलेश्वर, जिला दुर्ग को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास सहित विभिन्न धाराओं में कठोर सजा सुनाई है।
पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय (भा.पु.से.) के निर्देशन में इस प्रकरण की प्रभावी एवं वैज्ञानिक विवेचना की गई। शिकायत प्राप्त होने पर चौकी बिरेझर में भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने सतत पतासाजी, तकनीकी विश्लेषण, वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रमाणों के आधार पर पीड़िता को सकुशल बरामद किया।
जांच के दौरान संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376(2)(जे)(एन) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों और तर्कों से संतुष्ट होकर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने आरोपी को धारा 363 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड, धारा 366 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000 रुपये अर्थदंड, तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अंतर्गत 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 3,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में उत्कृष्ट विवेचना, सशक्त साक्ष्य संकलन और प्रभावी न्यायालयीन समन्वय के लिए पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने तत्कालीन विवेचना अधिकारी निरीक्षक चंद्रकांत साहू के कार्य की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की।
धमतरी पुलिस ने कहा है कि महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के मामलों में "जीरो टॉलरेंस" की नीति के तहत प्रत्येक प्रकरण की त्वरित, निष्पक्ष एवं प्रभावी विवेचना कर दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
